
एक दीप मेरे श्याम का घर घर जलाइए
एक दीप मेरे श्याम का,
घर घर जलाइए,
दीप जला के श्याम को,
हस कर मनाइये,
तर्ज – एक बार हमसे सांवरे नज़रे।
उनकी की कृपा से चल रही
जिंदगी की ये डोर,
बाबा करेंगे रक्षा
बच्चों की चारों ओर,
दो पुष्प भाव के,
चरणों मे चढ़ाइए,
बाबा के नाम का लहू,
नस नस में भरके देख,
करते है रक्षा हरदम,
महसूस करके देख,
अब प्यार से शीश,
चरणों मे झुकाइये,
‘राहुल’ की एक विनती
सुन ले ओ सांवरे,
कर दो कृपा सभी पर
ओ मेरे सांवरे,
हम ने जलाया दीप,
अब सब भी जलाइए,
लेखक / प्रेषक – राहुल अग्रवाल (एडवोकेट)
कासगंज, मोबाइल न
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