
ऐसे न छेड़ो तुम कान्हा
ऐसे न छेड़ो तुम कान्हा क्यों करते हर बार,
आखिर मुझको भी तुमसे प्यार,
ओ कान्हा मेरे तेरे बिना हु बेकरार,
मुझको पता है सबका अकेला यार तू,
सब की चाहत का इकलौता यार तू,
फिर भी हम को तुमसे ही महोबत है,
मेरे भी सपनो का है संसार तू,
इक दिन सुनो गे मेरा दिल कहता बारम वार,
जान भुज कर तुमसे पीछे हट ती हु,
इन दुनिया वाले से मैं तो डरती हु,
तेरे बिना न ऐसे ही रह पाओगी,
दिल का हाल मैं तुम से व्यान करती हु,
मेरी इस कोशिश को करो न कान्हा तुम बेकार,
तेरी हुई दीवानी कान्हा सदियों से,
तू ही पीछे हटता मेरी कमियों से,
अपना बनाने मुझको ये सौगात दे,
वरना हाथ मैं धो बेठू गी जान से,
मैंने तुझको अपना बनाया तू भी बना ले यार,
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