
ओ श्याम जी मोहे रंग दीना
ओ श्याम जी मोहे रंग दीना,
अपने ही रंग में मोहे रंग दीना ।
देखूं जिधर कन्हाई,
तू ही तू दे दिखाई ।।
ऐसा जादू कर दीना,
मोहे रंग दीना, मोहे रंग दीना ।
जब से ओढ़ी श्याम चदरिया,
बन बन डोलूं बनके बावरिया ।
चढ़ी प्रेम की सूली,
दुनिया को मैं भूली ।।
छलिये को भूल सकी ना,
भूल गई मैं हसना रोना,
जबसे मिला मुझे श्याम सलोना ।
रंग डाला जीवन को,
मेरे फूल से मन को ।।
अपने वश में कर लीना,
आँख खुली और टूटा सपना,
समझ गई मैं तू ही है अपना ।
दो दिन का है मेला,
झूठा जगत का झमेला ।।
बेधड़क है कुछ भी कही ना,
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