
कटती गाया री पुकार सांभलजो बीरा
कटती गाया री पुकार,
सांभलजो बीरा,
जद सु ए गाया कट रही,
धर्म ध्वजा थारी झुक गई,
नीची निज़रा सु मत भाल,
पढ़ लो रे वेद पुराण,
बतलायों संतो,
पाँच माता रो प्रमाण,
पहली तो जननी माता,
दुजी आ धरती माता,
गउ गंगा और अंबा माँ,
पशु नहीं है गौ मां,
बतलाए संतो,
पशु नहीं रे गउ माँ,
देवों रो वास इनमे,
तारे भव त्रास पल में,
पूज्या वैतरणी कर दे पार,
कलयुग कसाई काल,
बिलखे हैं गाया,
सुन लीज नर-नारी,
चारा पानी ने तरसे,
भूखी प्यासी आ भटके,
कोई ना लेवे संभाल,
राक्षस बणयो रे इंसान,
खावड़ा ने लागो गो मातारो मास,
बलबलतो पानी डोले,
ऊबी आडी ने चीरे,
आरा चाले हाड मास,
जाग हिन्दु अब जाग,
कई जोवे बाटा,
कद होसी अवतार,
करना हो तो खुद ही कर लो,
गाया के खातिर मरना,
करो कोई शुरुआत,
ब्राह्मण कन्या ने गौ माता,
हत्या रो लागे,
घोर नरक कुंभी पाक,
‘उदय सिंह’ भजन बनाया,
भारत में गाय सुनायों,
राष्ट्रमाता रो मिलजो मान,
लेखक / गायक और प्रेषक – उदय सिंह जी राजपुरोहित।
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