
कठे गयो नखराली थारो घर वालो
कठे गयो नखराली,
थारो घर वालो।।
प्रीत गनी प्यारो गणों लागे,
तू सूती वो हरदम जागे,
बागा को सैलानी भंवरो,
फूला में रमवा वालो,
ये कठें गयो नखराली,
स्वर्ण महल कनक अटारी,
ज्यारी खिड़किया न्यारी न्यारी,
पांच जना की पहरा दारी,
कीकर टुटीओ तालो,
दौड सकू तो हाथ नही आवे,
भोली नार क्यों भटका खावे,
सुर वीर वाने पकड़ नी पावे,
यो तो छल कर गयो चनगलो,
तू सोला सिंगार सजाती,
पिऊ के मोह में मदमाती,
कण कण ओंकार निरंजन,
यो चेतन रमवा वालो ये,
प्रेषक – नँद लालजी भाट।
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.


