
कबूतर ले जा रे मैया की लाल चुनरियाँ
मैया की लाल चुनरियाँ कबूतर
जा चुनरी मैया के चडइयो ऐ रे कबूतर भूल न जाइयो,
बैठी है उची पहाड़िया कबूतर
संकट हरनी शारद मैया जिनके अंगना में भाजे वधाई
बाजे ढोल नगड़िया कबूतर
पर्वत ऊपर बने है दीवाला,
जा सोनन की लेजा माला
बहुत ही कठिन डगरिया,
अब तो चैन जिखा नैया
माँ मिले है कब पखारन पईया,
दर्शन की प्यासी नजरिया कबूतर
मैया के चुनरी चड़ाओ रे आई मैया नो दिन के लाने
चन्दन के पेडीया पे बेठी भवानी
दर्शन करन को दुनिया दीवानी
भगती में मन के रंगावे आई मैया नो दिन के लाने
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