
मनमोहन घनश्याम जी , आन सवारो काज
लूट ना जाऊ आज में , रखो मेरी लाज
सावरे कान्हा तू मेरी लाज बचाले , लाज बचाले
की और मेरा कोई नही
पर्दा ना उठे मुझे दुनियाँ से उठा ले , दुनियाँ से उठा ले
पंचो में दे बैठी जिनको अपना हाथ में
पाँच पति पाकर भी रह गई अनाथ में
हार के बैठे है मुझे जीतने वाले , जीतने वाले
दुष्ट मुझे लाया है बालो से खींच के
पाण्डव सब बैठे है आँखों को मीच के
करते है फरियाद खुले बाल ये काले , बाल ये काले
आज मेरी हालत पे आँच अगर आएगी
श्याम मेरी लाज नही तेरी लाज जाएगी
डूब ती नैया को किया तेरे हवाले , तेरे हवाले
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