
विनती सुन लिजो थारे दास री,
माता भटीयाणी,
बिनती सुन लिजो थारे दास री,
आया मै थारे दरबार,
ओ माता भटीयाणी,
कलयुग मे परचा साचा आपरा,
महिमा है अपरमपार।।
गढ रे जसोल थारो देवरो,
दर्शन आवे नर नार,
ओ माजीसा म्हारा,
भगता रा दुखडा मेटो,
आप तो रानी भटीयाणी,
आप तो माता भटीयाणी,
साचो है थारो दरबार,
दूर देशारा आवे यात्री,
माजीसा म्हारा,
हिवडा मे आस लगाय,
श्रद्धा सु गावे थारी आरती,
मनच्छा यह फल सब पाय,
म्हाने भरोसो मोटो आपरो,
कलयुग मे थारो है आधार,
चरना मे चाकर राखो आपतो,
रानी भटीयाणी,
इतरो करजो उपकार,
शिश सुहावे थारे चुनडी,
पेरन नवसर हार,
नथडी तो सोवे थारे नाक में,
बिछ्या री झनकार,
घर घर में पूजा होवे आपरी,
ध्यावे है सब संसार,
ओ माजीसा थाने,
दास अशोक आयो आसरे,
नैया लगावो भव पार,
नैया लगावो भवसु पार।।
गायक – मोईनुद्दीन जी मनचला।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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