
कान्हा मेरी लाज अनमोल है,
तेरे सिवा कौन इसे रखेगा श्याम,
तुझे तो पता ही होगा,
इसका क्या मोल है,
तर्ज – साथी तेरा प्यार।
लाज गई तो कुछ भी ना रह जाएगा,
ये दुखियारा जीते जी मार जाएगा,
कान्हा अंधकार घनघोर है,
एक सहारा सबको मिल ही जाता है,
पर मुझको तो वो भी नज़र नही आता है,
कान्हा मेरे हाथ कमजोर है,
इसका जौहरी और कही ना पाया हूँ,
‘बनवारी’ मैं पास तुम्हारे आया हूँ,
कान्हा तू बता क्या मोल है,
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