
काया नगर रे बीच में रे,
लेहरीया लंबा पेड खजूर,
चढे तो मेवा चाकले रे,
पडे तो चकनाचूर,
भजन मे सुभरमना रे,
लेहरीया हरी सु राखो हेत,
प्याला भर भर पिवना रे,
लेहरीया लागी हरी सु डोर।।
अरे शब्द कठारी वाकडी रे,
लेहरीया गुरू गमरी तलवार ओ,
शब्द कठारी वाकडी रे,
लेहरीया गुरू गमरी तलवार,
अविनाशी री फौज मे रे,
कदेनी आनो हार,
अरे माखी बैठी शहद पे रे,
लेहरीया पंखुडीया लिपटाय ओ,
लेहरीया पंखुडीया लिपटाय,
उडने कासा सासा भया रे,
लालच बुरी रे बला,
अरे जंतर पडिया जोजरा रे,
लेहरीया टूट गई सब तार,
लेहरीया टूट गई सब तार रे,
तार बिचारो कई करे रे,
गयो रे बजावन हार,
अरे गमन थमे गोला तपे रे,
लेहरीया धड धड पडे रे जंजीर ओ,
गमन थमे गोला तपे रे,
लेहरीया धड धड पडे रे जंजीर,
रामानंद री फौज मे,
रामानंद री फौज मे रे,
सन्मुख लडे कबीर,
गायक – मोईनुद्दीन जी मनचला।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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