
कावड़ उठा ले फटाफट काम बने तेरा झट,
जावे दुःख तेरा कट ले बम बम तू रट खुले है भोले के पट,
कौन तू सिर पट,
चारो पासे बढ़ रहा भोले नाथ जी का रुतबा,
भोला भांग का नहीं बस भाव का भूखा,
जो है देवो में फ्रंट जो है वसा घट घट,
जो है बैठा मरघट देता भाग पलट,
क्यों रे मन भटकावे मौका फेर ना आवे,
जाके देख हरिद्वार भोला पार लगवाए,
थारे द्वार का टिकट करवाले झटफट,
जा रे भोले से लिपट कट जावे कट लथ,
प्यार का भोले का पा ले चल कावड़ उठा ले,.
विक्की जल रे चढ़ा ले भोले नाथ को रिजाले,
गिरी छोड़ झनझट होल शिव के निकट,
विष कर गए चट तेरा भोला नील कंठ,
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