
कि मोहन आप आ जाओ
कि मोहन आप आ जाओ
कि मोहन, आ...प, आ जाओ,
मेरा मन, याद, करता है ।
कन्हईया, आ...प, आ जाओ,
नयन से, नीर, बहता है ॥
साँवरिया, आ...प, आ जाओ,
मैं, अन्धी हूँ, मैं निर्बल हूँ ।
नहीं, कोई, सहारा है ॥
सहारा बन, के आ जाओ,
पड़ी, मंझधार, में नईया ।
इसे तुम, पार, लगा जाओ ॥
खिवईया बन, के आ जाओ,
ये यमुना जी, की लहरें हो ।
कदम्ब की, ठण्डी, छईया हो ॥
दर्श, इक्क बार, दे जाओ,
कभी मंदिर, में रहते हो ।
कभी, पर्दे, में रहते हो ॥
झलक, इक्क वर, दिखला जाओ,
मेरा, मन चैन, छीना है ।
तेरी, मुरली, की तानों ने ॥
निधि, वन में, चले आओ,
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