
लियो लियो हरी अवतार अजमल आंगनीये
लियो लियो हरी अवतार,
अजमल आंगनीये।
दोहा – हालो हरजी देवरे,
मिलसी रामापीर,
दुखीया रा दुख मेटसी,
बाबो साजा करे शरीर।
हरजी ने हरी मिलीया,
आडे मार्ग आय,
पूजन दिनो घोडलो बाबा,
दूध पीवन ने गाय।
झूले बाबो पालनीये,
अरे आयो आयो द्वारका रो नाथ,
एक धारू रे घर जमलो जगायो,
ए रानी रूपादे वटे हरी जश गायो,
ए थाली में बाग लगाय,
जैसल डाकु बाबा देवरे आयो,
सिद्ध चरनो मे बाबा शिश झुकायो,
अरे तोरल करदी उनरी सहाय,
पाँच पीर मक्का सु आया,
आय धणी ने वचन सुनाया,
अरे मक्का सु कटोरा मंगाय,
तल्लो भगत पर आपत आयी,
चढने बाबो करी रे सहाई,
लीले चढने बाबो करी रे सहाई,
ए धड सु माथो रे जोडाय,
ऊंच नीच रो भेद मिटायो,
डाली बाई रो बाबा मान बढायो,
ओतो माली छवर जश गाय,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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