
केड़ा है नुगरो रा रे सेलान धारू रे वीरा
केड़ा है नुगरो रा रे सेलान,
दोहा – नुगरा नर तो माति मिलो,
और पापी मिलो हजार,
संत मिला के जगत में,
वो जावे भाव सु पार।
धारू रे वीरा,
केड़ा रे सेलाने हमी नुगरो ओलखो,
गुरु म्हारा जीवलो रे।।
लाम्बा है नुगरा ने वाला बाल,
बाई ये रूपा,
खड़ाऊ बान्धे नुगरो पोथियों,
गुरु म्हारा जीवलो,
नुगरो रे नितरा है अनोखा वेश,
चालन्तो छाया नरखो आपरी,
उभा है पिनघटये वाली पाल,
नार पराई ओथो निरखे घणी,
बैठा है पंचोे वालो बिच,
सत री वातो एतो काटे घणी
देवे है दुझा ने उपदेश,
घट रे भीतर एतो खोजे नही,
शिमरू सायब वालो नाम,
सिवरे जनोरो सायबो भेलो रेवे
भजन प्रेषक – श्रवण सिंह राजपुरोहित।
सम्पर्क – +91 90965 58244
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