
क्यों अपनो पे तू इतराए,
जाएगा कोई सँग ना,
अब मान भी लो मनवा,
मान भी लो,
मान भी लो मनवा।।
तर्ज – आन मिलो सजना।
जीव जन्तू से मानव बनाया,
कर कृपा फिर नाम लखाया,
कभी सँतो के ढिग तू न आया,
मिली बस्तू को दाग लगाया, हो..
हरि नाम का रँग है सच्चा,
दूजा कोई रँग ना,
यहाँ दौलत के सब है पुजारी,
बड़ी मतलब की है दुनियादारी,
आने वाली तुम्हारी है गाड़ी,
करलो चलने की अब तैयारी, हो..
समय अनोखा फिर न मिलेगा,
करले जो है करना,
आए विपदा कभी तेरे सर पे,
आएगा न कोई तेरे घर से,
माँग न ले कही तू खजाने,
मुहँ छिपाएगे वो इस डर से, हो..
मुक्त किया है गुरू ने तुझको,
अब बँधन मे बँधना,
– भजन लेखक एवं प्रेषक –
शिवनारायण वर्मा,
मोबा.न.8818932923
वीडियो अभी उपलब्ध नहीं।
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.





