
खोल खजाने बांट रहा है सबको बारी बारी
खोल खजाने बांट रहा है,
सबको बारी बारी,
बैठा खाटू में श्याम बिहारी,
ये दौलत देता है,
ये शोहरत देता है,
देता है महल अटारी,
सेठों का ये सेठ कुहावे,
कदे नहीं खाली लोटावे,
जग जाने दातारी,
गाँव गली शहरों में चर्चा,
हाथों हाथ ये देता है परचा,
कहती दुनिया सारी,
प्रेम के जो आंसू टपकावे,
उसपे सुख सारे बरसावे,
कलयुग का अवतारी,
यही ‘राम’ सुन के है आया,
रंक को तूने राजा बनाया,
छवि ‘बेधड़क’ प्यारी,
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