
गणपत गरवा ओपरा रे,
सिंवरो भाई संतो।
श्लोक – सौ सौ चन्दा ऊगवे,
सूरज तपे हजार,
इतरा चानण होत भी,
गुरू बिना घोर अन्धकार।
भव रे सागर में डूबता रे,
पद अबके लादो,
सतगुरु हेलो मारियो रे,
सुतोङा जागो,
शूरा पुरा रो खेलणो रे,
कायर डर भागो।।
नदी किनारे बेठणो रे,
जल पीणो ठंडो,
वचन गुरू रो मानणो रे,
पग धरणो आगो।
म्हारा सतगुरु हेलो मारियो रे,
बीज खेतर मे वावणो रे,
खारस मत वावो,
किदोङि कमाई,
आडि आवसी रे,
गाडा भर लावो।
हिरला बणजो हेत रा ओ,
हंस दावण हालो,
मोती समंदा नीपजे रे,
हंसला रो ठावो।
धरमी दास जग हेरिया रे,
एतबारो आयो,
केंवू दीवाना रे देश री ओ,
झूठी मत जाणो,
यह भजन
9588968848′ द्वारा,
‘राजस्थानी भजन डायरी’ से,
जोड़ा गया। आप भी अपना पूरा भजन,
टाइप करके,
वीडियो लिंक के साथ भेज सकते है।
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.
