
गुरासा शरण आपरी आया,
शरणों में आया,
बहुत सुख पाया,
मिट गया जमड़ा रा दाया,
ओ मन म्हारो काग सरूपी,
अवगुन बहुत भराया,
सतगुरु स्वामी हंस बनाया,
मेहरम मोती पाया,
ओ म्हारी सुरता घनी नखराली,
फिर फिर गोता खाया,
सतगुरु बाण शब्द रा वाया,
नुरता नीसाण घुराया,
अब म्हारी सुरता लागी राम सु,
तारो तार मिलाया,
आठो पोहर अमीरस बरसे,
पिवत प्यास बूजाया,
वेगम वाणी गम में जाणी,
आत्म में ओलखया,
जीव शिव एकण घऱ लाया,
हेमनाथ जस गाया,
गायक – सुरेश लोहार।
भजन प्रेषक – सावला राम प्रजापती।
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