
गोपालो झलके अंखियन में नागर जी
गोपालो झलके अंखियन में,
नन्दलालो झलके अंखियन में।।
मोर मुकुट पीताम्बर सोहे,
वो घूंघर वाले बालों में,
हाथ मुरलिया ने काँधे कमलिया,
और कुण्डल झलके कानो में,
बाग़ बगीचा कलियाँ देखि,
और नजरे डाली फूलों में,
जित देखूं उत गोपालो है,
वो गोपी गाया ग्वालों में,
कान्हो ही कान्हो बस गयो मन में,
और कुछ नहीं आवे ख्यालों में,
गाया बछड़ा सब कोई बोले,
और भंवरा बोले बगियन में,
गली गली में शोर मच्यो है,
और चर्चा हो रही गलियन में,
स्वर – संत श्री कमल किशोर जी नागर।
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