
गौरी सूत शंकर लाल विनायक मेरी अरज सुनो
गौरी सूत शंकर लाल,
विनायक मेरी अरज सुनो,
बैठा भागवत महा पूराण,
सब देवन मे आप बड़े हो,
तुमको प्रथम मनावे,
घर मे गणपति सदा बिराजे,
कारज शुभ करावे,
संग रिद्धि सिद्धि,
संग रिद्धि सिद्धि आओ आज,
मेवा फल मोदक और लड्डू,
जिनको भोग लगवे,
सखी सहेली मिल करके
सब मंगल आरती गावे,
देव मिलकर,
देव मिलकर चवर दुलावे,
ब्रह्मा विष्णु शंकर भी है,
जिनके गुण को गाते,
महिमा का वर्णन तो,
देवी देव मुनि ना पाते,
सब मिलकर,
सब मिलकर शीश झुकावे
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