
घोड़लिया श्याम ने लेकर म्हारे घर कदसी आवेलो
घोड़लिया श्याम ने लेकर,
म्हारे घर कदसी आवेलो,
पघारा घुघरा तेरा,
आँगणिया कद बजावेलो,
तर्ज – ना झटको जुल्फ से पानी।
सेवक की सेवक से अर्जी,
व्याकुल खुदगर्ज की गरजी,
तिसाया नैन दर्शन का,
या तृष्णा कद मिटावेलो,
तू ख़ासम ख़ास है दर को,
साँवरीयो म्हारे भी घर को,
निभावन यार की यारी,
जुगत कदसी भिड़ावेगो,
साँवरीयो बैठ्यो है घट में,
क्यो ढूढ़े मंदिर और मठ में,
यो भूखो प्रेम को ‘सरिता’,
प्रेम में बंध के आवेगो,
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