
चली मेरी मात भवानी रे,
माई सुनी लगे नगरीया,
नौ दिन आई करन मेहमानी,
घर घर जगदम्बा महारानी,
नैनन बरसे पानी रे,
बात कहूं क्या अपने दिल की,
आज रुके ना रोके हिलकी,
ये गलियां लगे वीरानी रे,
अपने रथ से उतर तुम आओ,
मैया कुछ दिन और रुक जाओ,
मगर मेरी बात ना मानी रे,
अखियां भगतन की भर आई,
माई तोरी कैसे करूँ विदाई,
कहे ‘बेनाम’ कहानी रे,
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