
जगत के सर पर जिनका हाथ,
वही है अपने भोले नाथ,
जिन चरणों में सदा झुकाती,
सारी दुनिया माथ,
तर्ज – भगत के वश में है भगवान।
श्रष्टि के पालक तुम ही,
कुशल संचालक तुम ही,
तुम्ही हो जग विस्तारक,
तुम्ही इसके संघारक,
जिनको पाकर कभी ना समझे,
खुद को कोई अनाथ,
हिमालय पर तुम रहते,
मार मौसम की सहते,
गले में सर्प लपेटे,
मगन मन रहते लेटे,
भूत प्रेत बेताल हमेशा,
रहते जिनके साथ,
कृपा सब पर बरसाते,
सभी का मन हर्षाते,
भक्त गण जब भी टेरे,
सदा जो दौड़े आते,
अनुज ‘देवेंद्र’ भी पाकर जिनको,
अब हो गए सनाथ,
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.




