
आप अमर हो, मैं मर जाती लेकर नाम तुम्हारा,
जन्म जन्म का साथ है हमारा और तुम्हारा॥
पहली बार मैं जन्मी दक्ष सुता कहलाए,
तुम्हें पाने की खातिर अपनी देह जलाई,
हवन कुंड में कूद पड़ी लेकर नाम तुम्हारा,
दूजी बार मैं जन्मी मेना माथ हमारी,
तुम्हें पाने की खातिर करी तपस्या भारी,
बेलपत्र खा खाकर मैंने बरसों किया गुजारा,
पिता हमारे बोले श्री हरि से मैं भ्याऊंगी,
मैं बोली ना ब्याह करूं चाहे कुंवारी मर जाऊंगी,
भोले बिन तो इस दुनिया में होगा नहीं गुजारा,
जब तक सूरज धरती अंबर चाँद सितारे,
तब तक भोले हम तो रहेंगे सदा तुम्हारे,
मिलो अगर ना इस जीवन में लेंगे जन्म दोबारा,
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