
जय राधा रसिक बिहारी
जय राधा रसिक बिहारी, श्री राधा रसिक बिहारी
तेरी सूरत है प्यारी प्यारी, तेरी सूरत पे जाऊं बलिहारी
इक तेरी सांवरी सूरत से, बस हो ही गया है प्यार मुझे
खायी है जमाने की ठोकर, अब तू ही मिला दिलदार मुझे
मेरे इस उजड़े गुलशन की, अब तक ना मिली है बहार मुझे
राधा रसिक बिहारी अब देर ना कर, झट से दिखला दे दीदार मुझे
बलिहारी लाला के नयन पे, बलिहारी छटा पे होता रहूँ
कभी भूलूं ना याद तुम्हारी प्रभु, चाहे जाग्रत, स्वपन या सोता रहूँ
कृष्ण ही कृष्ण पुकारा करूँ, मुख आंसुओं से निज धोता रहूँ
राधा रसिक बिहारी तेरे प्रेम में मैं, बस यूँ ही निरंतर रोता रहूँ
सूख गया आँखों का पानी तेरी याद में रोते रोते
भूलूं नहीं तेरी याद कभी, सवपन में कभी सोते सोते
राधा रसिक बिहारी, तुम से मिल ना सका यह जीवन खोते खोते
टूटे नहीं तेरे प्रेम की माला, यह माला पोते पोते
तेरी अखिया हरि कजरारी
कजरारी तेरी आँखों में क्या भरा हुआ कुछ डोरा है
तेरा तो हसन, औरों का मरण बस जान हाथ से धो रहा है
क्या खूब हसन बयान करो, यह सुन्दर श्याम सलोना है
ननद किशोरी के प्राण जीवन धन, ब्रिज का एक खिलौना है
देखा न ऐसा को दूसरा खूबसूरत, जैसा खूबसूरत श्याम सलोना है
अजूबे नूर वाला ऐसे महबूब वाला कहीं हुआ ना होना है
कादर कहत याकि चंचल चित्तवन, लटक मत चाँद याकि मुसकन में टोना है
नन्द जू को छोना यसुदा का ठिठोना सब जलकी निरोना दिल का खिलौना है
तेरी अखिया भरी कजरारी
बिहारी तेरे नैना रूप भरे
निरख निरख प्यारी राधे को, आनंद कहूँ ना तारे
सुख को सार समूह किशोरी, उमग उमग अंगतो भरे
ललित मोहिनी की निज जीवन, उर सों उरझ उरे
मेरी यारी रे बिहारी तोसे यारी,
यार दिलदार दिलरुबा तेरी दृश हम घेरे हैं
रात दिना सोवत ही जागत, एक तेरी माला फेरे हैं
हम को तुमसों एक प्राण, तुम्हे हमसे लाख घनेरे हैं
ललित किशोरी अब कृपा करो, भले बुरे जो तेरे हैं
अब तुझ को छोड़ के जाए कहाँ, काजल से भी भाद कर मेरे करम काले
फराद क्या सुनाऊ, लैब पर परे ताले
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