
जहाँ बरसाना है वही बस जाना है,
जाना नही है कही और,
जहा श्री राधा है प्रेम अगाधा है,
वही पे मिलेंगे चितचोर।।
तर्ज – हम तुम चोरी से बंधे इक डोरी से
इक इक पोड़ी तेरी, महलन की मैं धोऊंगी,
चवर ढुलाई देना, सारी रैन ना मैं सोऊंगी,
जप जप राधे नाम से, होगी जीवन की भोर,
प्यारी सी नगरी को तन मन से रोज बुहारूँगी,
थक जाउंगी जब राधे वह बैठ के तुम्हे पुकारूंगी,
दासन की में दास हु, करना किरपा की कोर,
खुश होकर राधाजी मोहे चरणन से लिपटायेगी,
चरण कमल की सेवा मुझे सहज में ही मिल जाएगी,
मस्त रहूँगा में नाम में, जग लाख मचाये शोर,
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