
जी करता है दर पे आँंऊ,
शिव शंकर त्रिपुरारी,
तेरी भक्ति में खो जाँऊ,
मेरे भोले भंडारी।।
तर्ज – झूठ बोले कौवा काटे।
जब तू मुझे बुलायेगा,
मैं भांग लेकर आउंगा,
मैं भांग लेके आउंगा,
मैं भांग लेके आऊंगा,
मैं तुझको भांग चढाउंगा,
मैं तुझको भोग लगाउंगा,
भांग तुझे है सबसे प्यारी,
मैं डमरू लेके आउंगा,
मैं डमरू लेके आऊंगा,
धुन डमरू की सुनाउंगा,
मैं डमरू खूब बजाउंगा,
डमरू की धुन बड़ी ही प्यारी,
तेरी महिमा के गुण गाउंगा,
मैं सबको यही सुनाउंगा,
मैं सबको यही बताउंगा,
तेरी महिमा सबसे भारी,
गायक / प्रेषक – मनीष कुमार।
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