
झुका के नजरें प्रणाम कर लो की श्याम सरकार आ रहे है
झुका के नजरें प्रणाम कर लो,
की श्याम सरकार आ रहे है,
की जिनके दर से मिला है सबको,
लो वो ही तशरीफ़ ला रहे है।।
तर्ज – है जिंदगी कितनी खूबसूरत।
हो ऐसा स्वागत ज़माना देखे,
कि आँखें भरके दीवाना देखे,
बजाओ ताली और ढोल ताशे,
हम गीत बाबा के गा रहे है,
झुका के नज़रे प्रणाम करलो,
लीले पे बैठा और मुस्कुराया,
लीले ने पूछा तो ये बताया,
बड़ी देर से हिचकी आ रही है,
मेरे बेटे मुझको बुला रहे है,
आया है कैसा हुजूम देखो,
सरकार के नाम की धूम देखो,
क्या भेंट रखूँ मैं इनके आगे,
जो मेरा खर्चा चला रहे है,
वो मेरे मालिक मैं उनका नौकर,
रहूँगा बस मैं तो उनका होकर,
मैं इस जनम में ना खर्च पाऊँ,
वो मुझपे इतना लुटा रहे है,
ये ‘राज’ कैसा असर हुआ है,
खाटू का जबसे सफ़र हुआ है,
मैं मैं नहीं हूँ वो हो गया हूँ,
वही रगों में समा रहे है,
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