
तुम ही मेरे सतगुरु,
तुम ही मेरे साहिब,
तुम ही दीनानाथ हो,
तर्ज – तुम्ही मेरे मंदिर।
बिना तेरे दुनिया में,
कोई नहीं मेरा,
तेरे ही चरणों में,
लगा लिया डेरा,
जिधर देखती हूँ,
उधर तू ही तू है,
हम दुखियों की,
पुकार यही है,
किसके द्वार प्रभु,
रोऊँ दुःख अपना,
तेरे बिना ये दुनिया,
दिखे एक सपना,
नाव पुरानी मेरी,
नदिया है गहरी,
आकर दिखा दो,
किनारा कहाँ है,
भले बुरे है तेरे,
दर के भिखारी,
कितनो की पहले तूने,
बिगड़ी सँवारी,
अब मेरी बार क्यों,
है देरी लगाई,
मुझको ना सूझे,
मैं क्या हूँ कहाँ हूँ,
आ कर के दर्श,
दिखा जाओ प्यारे,
हरिहरानंद जी के,
प्राण अधारे,
दीप्तानंद गुरु,
दासी के रक्षक,
कोई नहीं है,
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