
तेरा बणया चुरमा देशी घी में आ क भोग लगाइये हो
तेरा बणया चुरमा देशी घी में,
आ क भोग लगाइये हो,
परमानेंट रह घाटे में,
मेरे घर भी आइये हो।।
तेरे नाम का करया जागरण,
एक ब आणा होगा,
मात सीया और लखन राम को,
संग में लयाणा होगा,
कुछ दिन डट क जाणा होगा,
और मन्नै के चाहिए हो,
तेरा बण्या चुरमा देशी घी में,
इतणा त मन्नै भी बेरा,
काम बहोत तन्नै घाटे में,
दुर दुर त आव दुखिया,
के फादया तन्नै नाटे में,
काम चले ना नाटे में,
दो दिन डट कर जाइये हो,
सोवण दे ना मन्नै रात ने,
घर में ओपरी छाया,
भुत प्रेत का करै खात्मा,
न्यु तेरे दर आया,
दुख पारी स काया मेरी,
एक ब गदा घुमाइये,
हो बालाजी तेरे मंदिर में,
आज लाग रहे जयकारे,
गुरु रामसिंह नरेन्द्र कौशिक,
तेरे मंदिर आ रे,
कप्तान शर्मा ने संग में लयारे,
उस त ज्ञान सिखाइये हो,
प्रेषक – राकेश कुमार।
खरक जाटान(रोहतक)
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