
तेरे तीन बाणों में जादू है,
हारो को जीता देते है,
एक बाण इस पीपल के सारे,
पत्तो को मिटा देते है,
तर्ज – तेरे चेहरे में वो जादू।
बन गए अवध में आ के राम,
ब्रज जन्मे बन घनश्याम,
प्रकटे कलयुग में देवा,
पावन बन गया खाटू धाम,
बाबा मेरे है अंतर्यामी,
सबकी हरते पीड़ा स्वामी,
जो भी फिसलते है अज्ञानी,
उसकी बढ़ के कलाई थामी,
उनकी माया का छोर नहीं,
रंक से राजा बना देते है,
कोई ध्वजा लिए जाए,
कोई चूरमा ले जाए,
कोई मुफ़लिस श्रद्धा से,
अपने आंसू बस दे आये,
सबको अपना तुमने माना,
कोई फर्क ना तुमने जाना,
जो भी राह भटकते है,
उनको देते तुम ही ठिकाना,
तेरे जैसा कोई और नहीं,
बिगड़ी जो बना देते है,
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