
तेरे प्यार में,
प्यार में रे प्यार में।
दोहा – ये मीरा मेवाड़ की,
रंग गई श्याम के नाम,
दुनिया ये कहने लगी,
अब मीरा के घनश्याम।
तोड़ जगत के बंधन झूठे,
मीरा हुई दीवानी,
लेकर के इकतारा नाचे,
वो महलों की रानी,
तर्ज – दे दे प्यार दे।
राणा ने मीरा से पूछा,
तू किसके रंग रांची,
मीरा बोली गिरधर के संग,
मेरी प्रीत है साँची,
मीरा खातिर भेज दिया,
राणा ने विष का प्याला,
विष का प्याला बन गया अमृत,
हे गिरधर गोपाला,
गली गली में जोगन बनके,
मीरा नाचे गाये,
श्याम रंग में रंगी चुनरिया,
लहर लहर लहराए,
मीरा हो गई कृष्ण की जोगन,
देख रहा जग सारा,
वो ढूंढे अपने प्रीतम को,
लेकर के इकतारा,
सुख छोड़े महलों के सारे,
लोक लाज बिसराई,
मीरा संग कान्हा की देखो,
हो गई प्रेम सगाई,
‘रोमी’ कहता ये जग सारा,
जब राधा को ध्याए,
राधा के संग मीरा का भी,
नाम लबों पे आए,
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