
थारी मोह माया ने छोड़,
राम ने भज रे ।
थारी उमर बीती जाय,
क्रोध ने तज रे ।
थारी उगमग चाले नांव,
चोला ने लज रे ।
तेरे सिर पर घूमे काल,
अगाड़ी सज रे ।
थारे गोड़ा दियो जबाब,
कमर गई लूल रे ।
तेरी आख्यां सूं दिखे नाय,
कान गया रुज रे ।
थारी परणी छोड़यो प्यार,
कदर नही कर रे ।
तेरा बेटा बोले बोल,
मरेलो कद रे ।
कह गया दास कबीर,
गुदड़ा लद रे ।
थारो लेखो लेसी राम,
मरेलो जद रे ।
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