
देव शनिश्चर आपको,
प्रणहु बारम्बार,
शक्ति है प्रबल तुम्हारी,
यही जाने सब संसार,
तर्ज – देना हो तो दीजिये।
सूर्यवंश अवतार तुम्ही हो,
छाया मात्र तुम्हारी,
नवग्रह में हो सबल सभी से,
हे व्रजासन धारी,
दुष्कर्मी को दण्डित करके,
देते हो जनम सुधार,
आप की दृष्टि पड़ी गणपति पे,
उनका शीश कटाया था,
गज की सूंड जोड़कर उनको,
जीवित पुनः कराया था,
है प्रथम पूज्य गणपति जी,
सब विघ्न विनाशन हार,
साढ़ेसाती दशा तुम्हारी,
जिन्हे कभी भी लग जाए,
सुमिरे सच्चे मन से तुम्हे तो,
तनिक कष्ट भी ना आए,
तुम शील शांति के दाता,
हो तेरी जय जयकार,
जो भी श्रद्धा भाव से देवा,
जपता नाम तुम्हारा है,
उनको ‘राधेश्याम’ तुम्ही ने,
दुःख से आन उबारा है,
हुआ धन्य ‘श्याम’ ये तेरा,
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