
नमण करूँ हे म्हारी मात नागणेचियां आरती
Naman Karuun He Mhaari Maat Naaganechiyaan lyrics
नमण करूँ हे म्हारी मात नागणेचियां,
जळहळ जळहळ जोत जळे,
अवल अनादि सगत री आरती,
ढोल नगारा घुरे चंवर ढुळे,
नमन करूं हे म्हारी मात नागणेचियां,
थळवट थान मढ नागोंणें थरपियो,
सगत सरूपी सातों रूप सरै,
तरुवर नीम्ब ज्यां नागणेची तूठी,
धन धन धूहड़ ध्यान धरै,
परगट हुई गगन पथ पंखणी,
मरुधर आई निज भगत मते,
आप चक्रेश्वरी हिंगलाज आवडा,
हरख्या संत जन दुष्ट हते,
सिंघ असवार अखिल जग सोहे,
विध विध रूप सकल विचरै,
नागण हुई अवल नारायणी,
झिलमिल मुखड़े तेज झरै,
जुग जुग सहाय हुई जगदंबा,
सुर नर सुधिजन काज सजै,
अविचल राज अवन पर अंबा,
भवतारण त्रय लोक भजै,
अनंत ईसरी रूप अनेकों,
कवि जन अगणित नाम कहें,
कमधज कुळ नागण कल्याणी,
रणचण्डी रखवाल रहें,
सातम तिथि विधिवत सेवा,
नित सुमरण कर संत नमै,
नवरात्रि सज रूप नवेलो,
रास रचण नवलाख रमै,
बाजे ताल मृदंगा बाजा,
कनक थाळ रणुंकार करै,
दीप धूप अजुआळे देवळ,
फरहर लाल धजा फहरै,
पान पदार्थ ध्वजा पड़ाई,
श्रीफळ मिसरी भोग चड़े,
अर्पण कर जन करे आरती,
पूजन कर कर पांव पड़े,
सुमरण आद साद सुण सगती,
सेवक भगती तव शरणे,
भूल चूक कर माफ भवानी,
भजन करत कवि ‘काळू’ भणे,
रचना एवं स्वर – कालुसिंह जी गंगासरा।
प्रेषक – भीमसिंह राजपुरोहित।
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