
नानी बाई की सासु ननंद,
बात न कर,
देखा भला मायरो वो को,
कुण रे भर।।
नई रे नानी बाई का,
काका न बाबा,
काका न बाबा भैय्या,
बाप वो को साधु न,
की संगत कर,
माय न मावसी,
माय न मावसी बईण,
भाई बिना मायरो,
वो को कुण रे भर,
द्वारकापुरी सी भाई,
वो को आयो,
छप्पन करोड़ को,
मायरो पुरायो,
नगर अंजार का लोग,
मुंडा हाथ रे धर,
प्रेषक – ललित धनगर ठीकरी।
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