
म्हाने ऐसा सतगुरु भावे,
आठो पहर रहे मतवाला,
भर-भर प्याला पावे।।
नरक जावण रा नाका मुन्दे,
उलज्या न सुलझावे,
जगत पुनित तारण तिरणे को,
भाग हमारे आवे,
मन को मार करे भल भेटा,
दिल का दाग मिटावे,
पांच पच्ची स परे ले पटके,
अन्दर ध्यान लगावे,
हरि बिना हृदय और ना राखे,
गुण गोविन्द रा गावे,
जड़ी सजीवन है उर अन्दर,
मृतक जीव जिवावे,
परम पुरुष के अरस-परस है,
पर्दा खोल मिलावे,
गुरु दादू सा चरण कमल पर,
रजहब बली बली जावे,
गायक – सीताराम जी पड़ियार।
प्रेषक – सांवरिया निवाई।
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