
पकड़ लो बाँह अब मईया, नही तो डूब जाएगी,
हमारा कुछ ना बिगड़ेगा, तुम्हारी लाज जाएगी,
पकड़ लो बाँह अब मईया......
तुम्हारे ही भरोसे पर जमाना छोड़ बैठा हूँ,
जमाने की तरफ देखो मुझे कैसे निभाओगे,
पड़ी मझदार में नैया खिवईया कोई नही अपना,
खिवईया आप बनो तो नैया हो मेरी पार जाएगी,
लदी है पाप की गठड़ी हमारे शीश के ऊपर,
वजन पापों का भारी है उसी से डूब जाएगी,
सकल जग ढूंढ कर हारे पता पाया नही तेरा,
ह्रदय में आप बस जाओ छवि मन में समाएगी,
तुम्हारी लाज जाएगी तुम्हारी लाज जाएगी,
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