
पराक्रमी अध्याय लिखेंगे,
ले दृढ़ता से ठान,
जग बोलेगा हो नत मस्तक,
जय जय हिन्दुस्तान,
बहुत सहे अपमान घात,
आघात सहन की सीमा होती,
छलनी छलनी दूप है माँ,
का लज्जा रोती,
होने दो संग्राम भयंकर होने दो,
लगे हुए सारे कलंक को धोने दो,
स्वाभिमान से आगे बढना,
परम विजय अभियान,
याद करे अपने गौरव,
सामर्थ्य ओर वैभव विराट को,
खुल्ला रखा है सदा जगत हित,
निज कपाट को,
किंतु शक्ति बिन कभी न होता,
जग में मान,
शक्ति मंत्र का हर युग मे,
होता गुण गान,
प्रबल शक्ति से दुष्ट दमन हो,
मिले सभी को प्राण,
आज व्यक्ति शिव शंकर बन,
प्रलयंकर अपना नेत्र खोलता,
शेषनाग भी रौद्र रूप फूपकार डोलता,
सागर मंथन से अमृत छलकायेगे,
भूमण्डल पर देव ध्वजा फहरायेगे,
मंगलमय कल्याण सभी का,
है संकल्प महान,
रचे नया इतिहास हरे सब त्रास,
बदल डाले भुगोल को,
दशो दिशायें खोल प्रगटाये,
नव स्वरूप को,
जग जननी निखरेगी फिर से,
एक अखंड,
जगत गुरु सिंहासन शोभे,
तेज प्रचंड,
महाभारत के चरण कमल मे,
अर्पित तन मन प्राण,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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