
पलकें बिछाये आस लगाये बैठी पुजारन,
आयेगी मैया,
कितने जनम ले, तुझको पुकारा,
कहता है ये मन, आयेगी मैया,
दरस दीवानी प्यासी अखियाँ,
देखने तुझको तरस रही है,
कब से निरंतर विरह की झड़ियाँ,
नैनो से रिमझिम बरस रही है,
गिरने से पहले तन की इमारत,
कहती है धड़कन, आयेगी मैया
कितने जनम ले......
दर्शन मैया दे अब तेरे,
तड़प रही हू चैन ना आये,
तेरा सुमिरन करते करते,
भटक रही हू चैन ना आये,
चाहे विधाता फिर भी माता,
अपना ये बंधन तोड़ ना पाये,
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