
प्रीतम बोलो कब आओगे
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
साजन बोलो कब आओगे॥
कब मन वीणा की झंकारों पर॥,
कोई अमर गीत बन छाओगे ॥,
मोहन बोलो कब आओगे ॥,
बिना बोले इस दासी को ॥
हरि चरनन सो लिपटाओगे॥
यह प्यार भरा दिल रोता है॥,
थर्राते लम्बे साँसों में,
अंसुअन के माल पिरोता है,
अंधियारी सूनी कुंजो में,
रातों भर बाटें जोहता है,
हँसते, इठलाते , प्यार भरे,
सुनी सुनी रातों में हम तुम्हें पुकारा करते हैं
सब प्यार जगत का झूठा है,
कुछ मान भाग्य पर था अपने,
पर वो भी जैसे फूटा है ।
ओ बिगड़ी बनाने वाले श्याम,
क्या तू भी मुझसे रूठा है,
सब दूर करो झंझट मेरे,
जोगन आँचल फैला निकली,
जग लाज के बंधन तोड़ चली,
कुल तान की आन मिटा निकली,
सारे श्रृंगार बिखेर दिए,
एक भगवा भेष बना निकली,
मैं तेरी मोहन तेरी हूँ
मैं तेरी प्यारे तेरी हूँ
मैं जैसी हूँ अब तेरी हूँ
ये भुजा उठा कर गा निकली,
न जाने मोहन कहाँ छिपे
मैं दर दर अलख जगा निकली
अब बैठ गयी पथ में थक कर,
क्यों नहीं आते मेरे मन मंदिर में
तुम प्रेम की ज्योत जगाने
क्यों नहीं आते मेरे ह्रदय कुञ्ज में
चोरी से छिप जाने
क्यों नहीं आते मेरे मन मधुबन में
तुम सुन्दर तान सुनाने
क्यों नहीं आते मेरे अंगना
लूट लूट दधि खाने
मीरा के गिरधर लाल सही
राधा मुख चाँद चकोर सही
गोपिन के मदन गोपाल सही
नरसीं के सांवल सेठ सही
यशोदा मैया के लाल सही
तुम सूरदास के श्याम सही
तुलसी के राम कृपाल सही
जब सारा आलम सोता है
हम चुपके चुपके रोते हैं
रो रो कर अपने प्यारे के
कोमल चरणों को धोते हैं
कभी पलकों में आकर आशुँ
अखियों के झरोखों में छिप कर
अपने प्यारे की आने की
मेरे प्यारे
कान्हा रे -॥॥
आशा रख पगली आएंगे
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