
फैसला दरबार का सांवले सरकार का मंजूर है
फैसला दरबार का,
सांवले सरकार का,
मंजूर है मंजूर है,
हमने देखी तेरी अदालत,
चलती नहीं किसी की वकालत,
ये है दर इन्साफ का,
जो हुकुम हो आपका,
अपनी तो है अर्जी बाबा,
आगे तेरी मर्जी बाबा,
काम नहीं तकरार का,
हमको रिश्ता प्यार का,
बनवारी और कुछ ना कहना,
हमको तेरी शरण में रहना,
मैं हूं सेवक आप का,
जो हुकुम माई बाप का,
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