
श्याम नाम की मेहंदी रचाकर,
घूँघट में शर्माउंगी,
बनके दुल्हनिया श्याम पिया की,
ब्रज नगरी अब जाउंगी,
श्याम नाम की मांग भरी और,
श्याम चुनरिया ओढ़ी रे,
श्याम प्रीत रंग राची ऐसी,
दुनिया से मुख मोड़ी रे,
वो मेरा हो जायेगा और,
मैं उसकी हो जाउंगी,
गईया चराने वो जायेंगे,
मैं उनके संग जाउंगी,
श्याम बजायेंगे बंशी,
और मैं नाचूंगी गाउंगी,
थक जायेंगे श्याम पिया तो,
उनके चरण दबाऊँगी,
सूरज रंग चढ़ा मेहंदी का,
मैं तो ऐसी लाल भई,
श्याम पिया की बनके सुहागन,
सातो जनम निहाल हुई,
सदा सुहागन कहलाउंगी,
जीवन सफल बनाउंगी,
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