
बनवा दे भोले सोने की एक अटरिया,
तुम तो भोला अस्सी बरस के मेरी बली उमरिया,
शिव शंकर ने हुकम किया जब विश्कर्मा बुलवाए,
सोने का तो महल बनाया सोने के खम्ब लगाए ,
इसी सुंदर बनी अटरिया ठहरे नहीं नजरिया,
महल बना जब सोने का तो हवन यज्ञ करवाया,
रावण जैसा ज्ञानी पंडित पूजन को बुलवाया,
पूजा करते करते पड़ गई रावण की नजरिया,
रावण बोला ओ मेरे स्वामी मैं हूं दास तुम्हारा ,
सोने का ये महल आपका लगे बड़ा ही प्यारा,
मुझे दान में देदो भोले सोने की ये अटरिया,
महल अटारी दान में देकर शिव कैलाश पधारे,
रूंठ के बैठी गौरा मैया शिवजी लगे मनाने,
अपने भाग्य में नहीं है गौरा सोने की अटरिया,
शिव शंकर हनुमान बने सीता का पता लगाया,
पूंछ में बैठी गौरा मैया लंका नगर जलाया,
खाख में मिल गई रावण तेरी सोने की अटरिया,
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