
बलम पिचकारी
बालम पिचकारी जो तूने मुझे मारी
तो बोले रे ज़माना ख़राबी हो गयी
मेरे अंग राजा जो तेरे रंग लगा
तो सीधी-सादी छोरी शराबी हो गयी
इतना मज़ा, क्यूँ आ रहा है
तूने हवा में भांग मिलाया
दुगना नशा क्यूँ हो रहा है
आँखों से मीठा तूने खिलाया
हो तेरी मलमल की कुर्ती गुलाबी हो गयी
मनचली चाल कैसे नवाबी हो गयी तो
तो सीधी साधी छोरी शराबी हो गयी
हां जीन्स पहन के जो तूने मारा ठुमका
तो लट्टू पड़ोसन की भाभी हो गयी
तेरी कलाई है, हाथों में आई है
मैंने मरोड़ा तो लगती मलाई है
महंगा पड़ेगा ये चस्का मलाई का
उपवास करने में तेरी भलाई है
हो बिंदिया तेरी महताबी हो गयी
दिल के अरमानों में बेहिसाबी हो गयी
क्यूँ
की होठों पे गाली है
जबकि तेरे दिल का कमरा तो खाली है
कमरा तो खाली है …
मुझको पता है रे …क्या चाहता है तू
बोली भजन तेरी नीयत कवाली है
जुल्मी ये हाज़िर-जवाबी हो गयी
तू तो हर ताले आज चाबी हो गयी तो
हां बोले रे ज़माना ख़राबी हो गयी
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