
पैदल पैदल चाला,
बापिणी धाम चाला,
बापिणी मेहोजी रो धाम,
सगला हिलमिल चला।।
बापिणी धाम प्यारी है,
मेहोजी री महिमा भारी है,
दाता मंगलिया सिरदार,
संग में डीजे बाजे है,
दादोसा के भगत नाचे है,
सगला बोल रिया जयकार,
बाकर सिंह आवे है,
भाणु ने साथै लावे है,
भानु रो नखत सिंह है नाम,
‘ममता कच्छावा’ गावे है,
जैसलसर गांव बतावे है,
दाता कृषि पूर्ण काम,
‘बजरंग कच्छावा’ बोले।।
लेखक – बजरंग कच्छावा।
स्वर – ममता कच्छावा।
जैसलसर नोखा।
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