
बाबा अमरनाथ महादेव,
थाने खम्मा घणी,
थे हो ऊंचा पर्वत वासी,
पर्वत चढता चढता बोलो,
हर हर हर महादेव जी,
नाम लेवो धणीया रो एतो,
पूर्ण होवे सब काज जी,
बोले शिवजी सुनलो पार्वती,
अमर कथा मे सुनावु जी,
बोले ए शिवजी सुनलो पार्वती,
आप हुंकारा देवो गवर्जा,
मै सुनावु सब बात जी,
शिवजी कथा सुनावे एतो,
नींद आ जावे गवरा मात जी,
देवे हुंकारो ओतो सुओ,
सुखदेव मुनी हो जाय जी,
अमरनाथ बर्फानी बाबा,
रटू नाम दिन रात जी,
सेवक जाणे दर्शन दीजो,
आयो थारे दरबार जी,
मापर मेहर करो शिव भोले,
देवा के महादेव जी,
दुनिया दर्शन आवे थारे,
निवन करे नर नार जी,
सावन मास मे मेलो लागे,
गूंजे जयकारा चारो खूट जी,
जय बाबा री अमरनाथ की,
बोले नर ओर नार जी,
भर पानी बाबा थारी महिमा,
वरणी न जावे आज जी,
शिव लिंग रा जो दर्शन करले,
जन्म सफल हो जाय जी,
भांग धतुरा भोग लगावु,
जीमो थे भोले नाथ जी,
अमिया गवर्जा भर भर लावे,
पिलो थे भोलेनाथ जी,
गणेश कार्तिक थाने मनावे,
नारद शारद साथ जी,
नंदी बाबा थारा गुण गावे,
सुमर सुमर भव पार जी,
देवा मे महादेव कहावो,
अमरनाथ महादेव जी,
जग में महिमा वरणी न जावे,
बरफानी उस नाथ की,
‘माली भूरजी’ सेवक थारो,
थाने अरज सुनाय जी,
‘श्याम पालीवाल’ थारा गुण गावे,
थारा चरना माय जी,
गायक – श्याम पालीवाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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