
बाबा की दया ते म्हारे ढ़ोल बजगे
बाबा की दया ते म्हारे ढ़ोल बजगे,
कोठी बंगले तो अनमोल सजग।।
मेंहदीपुर का स धाम निराला,
किस्मत का यो खोलः र ताला,
घाटे आले बाबा महारे मन रजगे,
बाबा की दया ते महारः ढ़ोल बजगे,
बालाजी ने रे मेहर फिराई,
दिल से सवामणी मन्नै लाई,
कुणबे के लोग बुराई तजगे,
पहले मेरा जीवन बड़ा ही अजीब था,
काम करया टुट क पर रहता गरीब था,
माड़ा सा नसीब था कर्म चढ़गे,
श्यामड़ी आले जपै नाम अनमोल है,
बल्लू ठेकेदार रटः ह्रृदय के पट खोल है,
कौशिक जी तो दिल तं भजगे,
गायक – नरेन्द्र कौशिक।
भजन प्रेषक – राकेश कुमार जी,
खरक जाटान(रोहतक)
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