
बाबा नीची थलवट ने ऊंचो देवरो,
दोहा – रामा कहु के रामदेव,
हिरा कहूँ के लाल,
ज्याने मिलीया रामदेव,
किया पल में निहाल।
ए बाबा नीची थलवट ने ऊंचो देवरों,
थारी ध्वजा फरूके असमान,
सवायो लागे देवरो।।
ए बाबा धोत रे धलीया मे बनीयो देवरो,
ए बाबा धोत रे थलीया मे बनीयो देवरो,
ए थोरे आवे आवे बालक ने नर नार,
बालक ने नर नार सवायो लागे देवरो,
ए बाबा नितलख आवे थारे जातरी,
ए बाबा नितलख बालुडा री मार,
बालुडा री मार सवायो लागे देवरो,
ए बाबा नवलख आवे थारे जातरी,
ए बाबा नवलख बाबा रे आवे जातरी,
बाबा दसलख बालुडा री मार,
ऐ बाबा नीची थलवट ने ऊँचो देवरों।।
ए बाबा आंधलीया आवे ओ थोरे जातरी,
बाबा आंधलो ने आँखीया दिराव,
आँखीया दिराव सवायो लागे देवरो,
ए बाबा पोन्गला आवे थोरे जातरी,
बाबा पोन्गला आवे थोरे जातरी,
बाबा पोन्गला ने पाव दिराव,
ए बाबा बांज्या आवे ओ थोरे जातरी,
ए बाबा बांज्या रा बाबा बांज्या रा,
पालनीया बंधाय पालनीया बंधाय,
ए बाबा हरजी भाटी री सुनजो विनती,
ओ बाबा हरजी भाटी री सुनजो विनती,
ए बाबा शरने आया सोरा राख,
गायक – शंकर जी टाक।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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