
अ र र र र अ र र,
बाबोसा आयो पाँवणा,
आयो रे आयो रे सजाऊँ,
घर आँगणा,
हो.. बाबोसा आयो आँगणा।।
तर्ज – अ र र आयो म्हारो ढोलना।
म्हारा मनडे रो नाचे मोर,
बाबोसा आयो रे,
गूंजे चहुँ ओर जयकारे,
जय बाबोसा सभी पुकारे,
रुत आई है मतवारी,
बाबोसा घर है पधारे हाँ रे,
म्हारे म्हारे म्हारे,
खुशियों छाई है द्वारे,
ढोली जमके ढोल बजा रे,
देखो अवसर है ये मन भावन,
मेरा धन्य जीवन हो गया है,
जिनके सपने में रोज ही देखु,
आज सपना वो सच हो गया है,
हो.. बाबोसा हो,
हुआ जबसे दीदार,
प्यारे बाबोसा का,
अरे प्यार प्यार प्यार,
मिला बाबोसा का प्यार,
दिया बाबोसा ने मेरा,
जीवन संवार,
गायिका – कविता राजवंश, मुम्बई।
लेखक – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’।
नागदा जक्शन म.प्र. 9907023365
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